Foreign Ruler After Moryan Dynasty

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Foreign Ruler After Morya Dynasty

मौर्य साम्राज्य के बाद पूर्वी भारत, मध्य भारत तथा दक्कन में शुंग वंश, कण्व वंश और सातवाहन वंश ने शासन किया।  उतरी – पश्चिमी भारत में मौर्यों के बाद मध्य एशिया से आये अनेक राजवंशो ने शासन  किया।

1. भारत में यवन  राज्य 

 
Foreign Rulers after Maurya Dynasty
 200 BC  के लगभग भारत में अनेक विदेशी आक्रमण(Foreign Invasion) हुए।  भारत में आक्रमण करने वालों में प्रथम बैक्ट्रिया(Bactrian)  के (यूनानी )थे।  इन्हे यवन (Yavans) भी कहा जाता है।  यह कहा जाता इन्होने अपना अधिकार अयोध्या (Ayodhya)तथा पाटलिपुत्र(Patna) तक कर दिया था।
इस वंश का सबसे प्रसिद्ध राजा मेनाण्डर(Menander) (165 -145 BC) था जिसे की मिलिंद (Milinda) के नाम से भी जाना जाता था जिसने भारत में यूनानी सत्ता को सुदृढ़ता एवं स्थायित्व(Stability) प्रदान किया।
जिसकी राजधानी सकल थी जिसे आजकल पंजाब में सिआलकोट(Sialkot in Punjab) के नाम से भी जाना जाता है।

इसने बोध दार्शनिक नागसेन(Nagsena) के मार्गदर्शन से बोध धर्म(Budhism) अपना लिया।  इन दोनों के बीच में हुए वार्तालाप का वृतांत पाली भाषा में लिखे गए “मिलिन्दपन्हो”(Milinda panho) में है। 

इन्होने भारी संख्या में सिक्के जारी किये तथा वे भारत में सोने के सिक्के (Gold Coins)जारी करने वाले प्रथम थे।
Foreign Rulers after Maurya Dynasty
यूनानियों के प्रभाव से भारतीय राजाओं द्वारा भी अपने सिक्कों पर नाम व् तिथि (Indian Rulers also started minting of their name in the coins as well as the date of coins)भी उत्कीर्ण की जाने लगी।
 
इनके द्धारा यूनान की प्रचलित कला हेलिनस्टिक आर्ट (Helinistic Art)कहते है को यहाँ भी प्रचलित किया जिसका सबसे बड़ा उदाहरण गांधार कला(Gandhar Art) है।
 

2. शक राज्य 

 

यूनानियों के पश्चात भारत में शकों (Shakas)का शासन किया।  इन्हे सीथियन(Scythians) के नाम भी दिया गया है इन्होने यूनानियों से भी अधिक क्षेत्र पर आधिपत्य किया।

ये पांच शाखाओं में विभाजित(Divided in 5 branches) थे – काबुल, तक्षशिला , मथुरा, उज्जयिनी और नासिक।

उज्जैन के एक  राजा ने  शकों को  युद्ध में हराकर विक्रमादित्य (Vikramaditya)की उपाधि(Title) प्राप्त की। । उसने  शकों पर इस विजय को अविस्मरणीय बनाने के लिए उसने 57 BC में  विक्रम सम्वत(Vikram Samvat era was started) युग प्रारंभ किया।  विक्रमादित्य की उपाधि ईतनी प्रसिद्ध हुई की बाद में जिस किसी राजा ने कोई महान कार्य किया उसको यह उपाधि प्रदान की गई। इसी वजह अब तक कुल 14 विक्रमादित्य हुए।  गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त  द्धितीय सबसे विख्यात विक्रमादित्य हुए।  
 
भारत में शकों का सबसे महानतम राजा रुद्रदामन प्रथम था (130 -150 AD) जिसकी उपलब्धियों के बारे में उसके द्धारा बनाये गए जूनागढ़ अभिलेख में भी दिया गया है।
 

3 . पल्लव राज्य 

पश्चिमोत्तर भारत में शकों के आधिपत्य के पश्चात पार्थियाई (Parthians)लोगों का मूल निवास स्थान ईरान (Iran)था।

पल्लव वंश का सबसे प्रशिद्ध शासक गोण्डोफर्निस(Gondofurnish) था इसके राज्य की राजधानी तक्षशिला थी।  

इसके शासन काल में St. Thomas ईसाई धर्म के प्रचार (propagation)के लिए भारत आए

पल्ल्वों की शक्ति और शासन का अंत कुषाणों(Kushans) ने किया।

4. कुषाण राज्य 

कुषाण भारत में उतरी मध्य एशिया में चीन (Central Asia , near China) के आसपास से भारत में आये।   इन्होने अपने साम्राज्य में मध्य एशिया, ईरान का कुछ भाग, अफ़ग़ानिस्तान के कुछ भाग पाकिस्तान तथा लगभग सम्पूर्ण उतरी भारत ले लिया।

कुजुल कदफिसेस (Kuzul Kudfises)बारात में कुषाण वंश का संस्थापक था।  इसके बाद बने राजा वीम कदफिसेस(Vim Kudfises) ने भरी मात्रा में सोने के सिक्के जारी किये जिनकी शुद्धता गुप्तकालीन सिक्कों से उत्तम थी।

72 इसवीं में कनिष्क(Kanishka) कुषाण साम्राज्य का शासक बना।  यह कुषाण वंश का सबसे प्रतापी शासक था।

इसने अपने शासनकाल में गांधार, कश्मीर, सिंध(Indus) और पंजाब(Punjab) पर अपना आधिपत्य स्थापित कर दिया

कनिष्क ने 78 AD में एक सम्वत प्रचलित किया जो शक सम्वत(Shaka samvat) के नाम से जाना जाता है।

कनिष्क के शासन काल में कश्मीर में कुण्डल वन में वसुमित्र(Vasumitra) की अध्यक्षता में चतुर्थ बोध संगती (Fourth Budhist Council )हुई।  जिसमे बोध धर्म हीनयान और महायान(Hinyan and Mahayan) दो भागों (Budhism was divided in to to sects)में बंट  गया।  

इसने अपने राज्य की पहली राजधानी पुरुषपुर (Modern Peshawar)बनाई।

गांधार, मधुरा अदि कला केंद्र (Art Schools)स्थापित हुए।

Foreign Rulers after maurya dynasty

इसके शासन काल में गौतम बुध की प्रतिमा (Worship of Statue)की पूजा (महायान शाखा द्धारा)प्रारम्भ हुई।

वात्स्यायन(Vatsyayan) द्धारा रचित कामसूत्र इसी समय की है।

निम्नलिखित लोगों को सरंक्षण दिया –
अश्वघोष जिन्होंने बुद्धचरित(Budhacharita) तथा सूत्रालंकार(Sutralankar) की रचना की।

नागार्जुन इन्होने माध्यमिक सूत्र (Madhyamika Sutra)की रचना की।

वसुमित्र (Head of the fourth budhist council )

चरक (चिकित्स्क थे जिन्होंने सस्रुता (Susruta)की रचना की


मथुरा में कनिष्क की एक सर-विहीन (Head less statue of Kaniska)खड़ी प्रतिमा मिली है। 

 

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